35 सप्ताह में कितने प्रतिशत जन्म होते हैं?HealthPlanet

Posted on Fri 14th Oct 2022 : 14:54

माना जाता है कि नौ महीने पूरे होने से पहले डिलीवरी हो जाए तो बच्‍चे का पूरा विकास नहीं हुआ होता है। वहीं, 36वें सप्‍ताह में शिशु का पैदा होना सही नहीं माना जाता है। एक समय पर 37वें हफ्तों को गर्भस्‍थ शिशु के लिए फुल टर्म (मतलब कि गर्भ में शिशु का पूरा विकास हो चुका है) कहा जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है।
आपके बच्‍चे का विकास
आपका बच्‍चा इस समय 17 या 18 इंच लंबाई का होगा। उसका वजन भी लगभग 2.5 किलो के आसपास हो गया होगा। उसका वजन जन्‍म तक बढ़ता रहेगा, मतलब आपका दुबला-पतला बच्‍चा अब अपने लिए फैट इकट्ठा कर रहा है।

प्रेगनेंसी के 35वें सप्‍ताह के लक्षण
इस समय बढ़ता वजन आपके दैनिक कामकाज और दिनचर्या में बाधा डालने लगा होगा। लेकिन यह स्‍वभाविक है वैसे भी अब कुछ ही हफ्तों की बात है। आपके सामान्‍य लक्षण पहले जैसे ही हैं:

सांस लेने में समस्‍या : जैसे बच्‍चे का आकार बढ़ता है आपके फेफड़ों पर दबाव बढ़ता जाता है। इसीलिए आपको सांस लेने में ज्‍यादा मेहनत करनी पड़ रही है।
पैरों में क्रैम्‍प्‍स पड़ना या ऐंठन : पैरों में क्रैम्‍प्‍स का सीधा सा हल है पानी पर्याप्‍त मात्रा में पिएं। खाली पानी पीने की जगह शिकंजी, नारियल पानी या फ्रूट जूस पिएं।
थकान के साथ चक्‍कर आना : आपको थकान के साथ चक्‍कर आने की समस्‍या हो रही होगी। असल में गर्भधारण में अहम भूमिका निभाने वाला हार्मोन प्रोजेस्टेरोन आपकी खून की नलियों को चौड़ा कर देता है। आने वाले समय में आपके शरीर में सामान्‍य अवस्‍था से लगभग 50 प्रतिशत खून ज्‍यादा होगा। शरीर को इस नई स्थिति के अनुकूल बनने में कुछ समय लगेगा।
कब्‍ज और बवासीर : बढ़ते वजन, आयरन की गोलियों के असर की वजह से अगर आपकी कब्‍ज बढ़ जाए तो यह बवासीर में बदल सकती है। अभी भी ध्‍यान न दिया जाए तो इनसे खून बहने लगता है। इससे शरीर में खून की कमी हो सकती है। इसलिए शुरू से ही फाइबर वाले फल-सब्जियां खानी चाहिए और पर्याप्‍त मात्रा में पानी पीना चाहिए। जरूरी हो तो डॉक्‍टर से संपर्क करें। यह भी पढ़ें : क्या प्रेग्नेंसी के दौरान ज्यादा पानी पीना चाहिए?
नाक से खून : शरीर में खून की अधिकता से आपका बीपी थोड़ा बढ़ जाता है। इस वजह से आपकी नाक की बारीक धमनियां कभी-कभी फट जाती हैं और थोड़ी मात्रा में खून की बूंदें निकलने लगती हैं। ऐसा हो तो सिर ऊपर करके बैठ जाएं, घबराएं नहीं। ध्‍यान रहे कि सिर ज्‍यादा पीछे न करें वरना खून गले में जाने लगेगा। नाक पर बर्फ लगा सकते हैं। पेट उठने वाले मरोड़ों, वजाइनल डिस्‍चार्ज और बच्‍चे के मूवमेंट पर लगातार नजर बनाए रखिए।

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